ಗೆಣಸ್ಲೆ
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Thursday, October 7, 2010
तनहायी..........
अंजान शेहर में
अंजान लोग
अंजान रास्तोमें
मेरी तनहायी पर मुस्कुराते रहे |
पर में फिर भी यूँही
अकेले बहुत दूर तक चलता रहा
और तुम बहुत देर तक याद आते रहे||
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