हल्कीसि हवा चली बारिश के बाद
एक दिया जल्ता रहा बारिश के बाद ॥
बूंदॆ गुनगुनातीथि छत के मुंडॆरॊंपर
किडकि कॆ कांच पर लिक्खाथा तेरा नाम बारिश के बाद ॥
घटा रुखसत हुयि, कुच सितारे चमकने लगे
पर चांद अभी कैद था बारिश के बाद ॥
थंडी थंडी मौसम तनहायी का साथ था
तेरी याद के चादर ऒढ्के सॊ गया बारिश के बाद ॥
Poem bariyakke start maadde anuu....Hmm
ReplyDeleteAllige......:)
No dude.. Its my old hobby. I am very much interested in Urdu poetry n gazals... I am a shayar by temperament.
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