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Sunday, October 10, 2010

रास्ता हि रास्ता

तुम्हे देखता हूँ जब पास से
एक साँस लेता हूँ विश्वास से
रास्ता हि रास्ता
कहाँ तक चलूंगा
तन्हा रात भर हूँ
कहाँ तक जलूंगा
यूँ शीषोँसे बचकर
यूँ भीडो मे चुपकर
बहुत थक गयाहूँ
में कहां तक चलूंगा ||

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