Pages

Wednesday, September 28, 2011

बारिश के बाद



हल्कीसि हवा चली बारिश के बाद
एक दिया जल्ता रहा बारिश के बाद

बूंदॆ गुनगुनातीथि छत के मुंडॆरॊंपर
किडकि कॆ कांच पर लिक्खाथा तेरा नाम बारिश के बाद

घटा रुखसत हुयि, कुच सितारे चमकने लगे
पर चांद अभी कैद था बारिश के बाद

थंडी थंडी मौसम तनहायी का साथ था
तेरी याद के चादर ऒढ्के सॊ गया बारिश के बाद

2 comments:

  1. Poem bariyakke start maadde anuu....Hmm
    Allige......:)

    ReplyDelete
  2. No dude.. Its my old hobby. I am very much interested in Urdu poetry n gazals... I am a shayar by temperament.

    ReplyDelete